चित्र लेखन

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धान पान सी
नार नवेली
चली अकेली
पनिया भरन को
या
मिलने सजन को
सूनी डगरिया
भरी गगरिया
चला न जाये
बरसे मेघा
पांव में कांटा
चुभ चुभ जाये
भीगी चुनरिया
बरसी बदरिया
पिया न आये

  • शशि पाठक

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