हे प्रिये तुम्हीं बतलाओ

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हे प्रिये तुम्हीं बतलाओ

विष्णु जी चिंतित हुए
और लक्ष्मी से बोले
देव, दानव, मानव मिले
इसलिए पृथ्वी डोले।

हिंसा, द्वेष, लालच भरा
हो रहे अत्याचार
भाई भाई लड़ रहे
फैला है व्यभिचार

जल, थल, नभ में हो रहे
परमाणु के वार
मरते हैं निर्दोष जन
मच रहा हाहाकार ।

राजनीति सब कर रहे
धवल पोष जजमान
बेटे, भाई मर रहे
उजड़े घर, परिवार ।

कलियुग का विस्तार है
है विनाश का जोर
महामारी और युद्ध की
हो रही है यहाँ भोर

बुद्धि भ्रष्ट सबकी हुई
समझ रहा ना कोय
मचा रहे ताण्डव यहाँ
धरती भी अब रोय।

कौन सा लूँ अवतार मैं
हे प्रिये तुम्ही बतलाओ
ये गुत्थी उलझी पड़ी
तुम ही अब सुलझाओ।

सुशीला शर्मा
64-65 विवेक विहार
न्यू सांगानेर रोड, सोडाला
जयपुर – 302019

1 COMMENT

  1. अद्भुत ।आपने मेरी रचना में चार चाँद लगा दिए ।कलमप्रिया संस्थान अध्यक्षा श्रीमती शशि सक्सेना जी आपका कोटि-कोटि धन्यवाद ।आपके साथ जुड़ना मेरे लिए परम सौभाग्य है ।इसी प्रकार अवसर प्रदान करती रहें ।लिखने का अवसर और माध्यम मिलता रहेगा ।पुनः आभार ।

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